|
धर्म एवं सामाजिक जीवन
2
Author(s):
DR. INDRAJEET ,DR. PRAVINYALATA MARKANDEY
Vol - 17, Issue- 2 ,
Page(s) : 375 - 378
(2026 )
DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
Get Index Page
Abstract
जहाँ मानव समाज है, वही धर्म है। ऐसा कोई भी समाज नही है, जहाँ धर्म का आस्तित्व न हो। इतना अवश्य है कि देश काल और परिस्थितियां धर्म के स्वरूप और कार्यों को प्रभावित करती है। जहाँ समाज है धर्म का आस्तित्व भी वही है ।
|