( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH

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(20) 21 वीं सदी के उपन्यासाें में व्यक्त सामाजिक परिपेक्ष

    1 Author(s):  DR. RASHMI MALAGI

Vol -  11, Issue- 10 ,         Page(s) : 101 - 107  (2020 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH

Abstract

स्त्री सशक्तीकरण का आन्दाेलन साै वष© से भी अpधक पुराना है । इसने pवpभन्न देशाें में अलग अलग रूप pलया । pस्त्रयाें के सामाpजक स्तर में भी पpरवत©न की आवश्यकता है । ये तभी संभव हाेगा जब पुरुष एवं स्त्री की बीच अंतर काे खत्म pकया जाये । पुरुषवादी मानpसकता में मpहलाओं के साथ लेकर बराबर का दजा© देकर चलना हाेगा अpत आवश्यक है । यpद मpहलाएँ अपने अpधकाराें व कत©व्याें काे जानेगी ताे सचमुच pवकास की ओर उन्मुक्त हाेंगी । शैpक्षक एवं आpथ©क संपन्नता तथा भूमंडलीकरण के दाैर में सशक्तीकरण काे स्वयं द्वारा सहभाpगता लेकर चलने का प्रयत्न करना हाेगा । तब उसे सशक्तीकरण का एक pसरा स्त्री मुpक्त के pलए शpक्त की आवश्यकता है और मुpक्त के pबना शpक्त की साथ©कता नहीं ।

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