( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH

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वेदों में भक्ति तत्त्व

    1 Author(s):  DR BHAGWAN DAS JOSHI

Vol -  11, Issue- 7 ,         Page(s) : 95 - 102  (2020 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH

Abstract

भगवान् से भक्ति की याचना करते हुए वेद कहता है- तस्य ते भक्तिवासः स्याम।। अर्थात् हम सदा पूर्वोक्तगुणविशिष्ट आपकी अतिशय भक्ति से युक्त रहें। श्रीमद्भागवत आदि पुराणों में भक्ति के नौ भेद बताए हैं- श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्। अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम्।।

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