( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH

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महिला सशक्तिकरण में पशुधन की भूमिका

    1 Author(s):  PUSHPANJALI KUMARI

Vol -  11, Issue- 2 ,         Page(s) : 161 - 165  (2020 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH

Abstract

सामाजिक विकाश की अवधारणा में आर्थिक विकास एक महत्वपूर्ण आयाम है, जो कि सामाजिक विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते है। आधुनिक काल में विकास के मापकों में नये-नये आयाम जुड़ने लगे है। तथा सामाजिक विकास लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन विकास का असली संकट नियोजित परिवर्तन है। अभिप्राय यह कि विकासात्मक कार्य से जुड़े लोगों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एक पक्ष के विकास की ऊँचाई दुसरी समस्या की गहरी घाटी में धकेल नहीं दे। इस क्रम पारंपरिक और आधुनिक विकास मानकों के विश्लेषण की बड़ी जरूरत है। विभेदक रेखा की पहचान का संकट और समाधान चिंतन का जरूरी आयम है।

1. प्रतियोगिता दर्पण - अतिरिक्तांक संस्करण भारतीय अर्थव्यवस्था 2011-12
2. धनकड़ - अतिरिक्तांक भारतीय अर्थव्यवस्था 2011-12
3. पशुचिकित्सा- डाॅ0 ओ पी सक्सैना
4. अरिहन्त- बिहार विस्तृत अध्ययन
5. ग्रमीण अर्थव्यवस्था - प्रो0 (डाॅ0) एल एम झींगन
6. पशुजनगणना- पशुजनगणना डेयरी व मत्स्य पालन विभाग भारत सरकार के वेवसाईट से
7. बिहार में पशुधन एवं ग्रामीण विकाश - डाॅ बी के केजरीवाल
8. बिहार एक परिचय - विशेस्वर दास, राकेश बाहादुर सिंह
9. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार स्कीम - बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण बिकास संस्थान पटना , बिहार
10. ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सहकारिता - प्रो0 बी एस माथुर
11. ग्रामीण अर्थशास्त्र्ा - प्रो0 (डाॅ0) एल एम राय

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