International Research journal of Management Sociology & Humanities
( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH
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नागार्जुन के काव्य की भाषायी बुनावट
1 Author(s): DEVINDER KUMAR
Vol - 13, Issue- 12 , Page(s) : 170 - 176 (2022 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
हिंदी कविता ने अपनी यात्रा के लगभग एक हज़ार साल पूरे कर लिए हैं। इतने लंबे समय में कविता ने भाव और शिल्पगत पक्षों की एक सुदीर्घ और परिवर्तनशील यात्रा की है। भाषायी आधार पर हिंदी कविता अपभ्रंश, अवधी और ब्रज से होते हुए समकालीन हिंदी खड़ी बोली तक पहुँची है।