( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH

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ईश्वर का पितृत्त्व और मानवमात्र का भ्रातृत्त्व - संत तुलसी साहब के परिप्रेक्ष्य में

    1 Author(s):  ARTI SATSANGI

Vol -  13, Issue- 6 ,         Page(s) : 138 - 148  (2022 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH

Abstract

प्रत्येक व्यक्ति के अभ्युदय और निःश्रेयस् का मुख्य साधन धर्म है। धर्म ही इस विश्व का आधार है। पूर्ण-मानव की कल्पना धर्म के बिना असम्भव है। परम चेतना के भण्डार परमात्मा का निज अंश मानव; इस संसार में धर्म को आधार बनाकर सांसारिक व्यवहारों में संलग्न होता हुआ उच्चतम गति को प्राप्त होता है।

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