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संतपरंपरा :लोक-मंगल और राष्ट्रीयता
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Author(s):
DR. SUMAN SWAMI, DR. MUKESH KUMARI
Vol - 15, Issue- 12 ,
Page(s) : 361 - 369
(2024 )
DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
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Abstract
- भारतवर्ष को यदि संत प्रधान देश कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। समय-समय पर अनेक साधु महात्माओं संतों, ऋषि-मुनियों ने हमारे देश में अपने कृतित्व तथा व्यक्तित्व के माध्यम से न केवल जनसाधारण को नवचेतना प्रदान की अपितु उनके सामाजिक नैतिक जीवन का उत्थान करने हेतु ज्ञान का संचार किया।
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