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भारतीय वास्तुकला के इतिहास के परिपक्व विकास का स्वर्णयुग
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Author(s):
PROF. KISHORE NAGNATHRAO POTDAR,PROF. SANTOSHRAO ARUN KHAWLE
Vol - 17, Issue- 5 ,
Page(s) : 133 - 138
(2026 )
DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
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Abstract
भारतीय वास्तुकला के इतिहास में मध्यकालीन काल (ई. 8वीं से 13वीं शताब्दी) को इंडो-आर्यन या नागर शैली की मंदिर वास्तुकला के परिपक्व विकास का स्वर्णयुग माना जाता है।
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