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निर्मल वर्मा की कहानियों में व्यक्तिवादी प्रवृत्तियाँ
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Author(s):
DR. SANTOSH KUMAR YADAV ,VIMAL KUMAR
Vol - 17, Issue- 1 ,
Page(s) : 271 - 282
(2026 )
DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
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Abstract
व्यक्तिवाद साहित्य और विचार की वह अवधारणा है जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्र चेतना, निजी अनुभूति और आत्म-अस्तित्व को केंद्र में रखा जाता है। यह मान्यता इस विचार पर आधारित है
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