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 पर्यावरण सुधार में पंचायती राज की भूमिका (राजस्थान के सीकर जिले के विषेष संदर्भ में)


    Author(s):  DR. RAKESH VERMA
Abstract

भारत के गाँव प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न रहते आये हैं परन्तु जीवन की कैसी विडम्बना है कि जिस प्रकृति ने हमें शुद्ध जल, वायु और हरी-भरी धरा दी हैं। उसे हम अपनी सुख सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए उसके रंग-बिरंगे हरियाली युक्त आँचल को उतारने पर तुले हुए हंै तथा उसे लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। इस बढ़ते प्रदूषण का प्रभाव राजस्थान के सीकर जिले के ग्रामीण परिवेष पर भी देखने को मिलता हैं। यहाँ बढ़ता हुआ अरवाली पहाड़ियों का खनन, बढ़ते ब्रिक्स उद्योग, घटता भू-जल स्तर, धूल भरी आँधियां एवं बढ़ते मरुस्थल ने इसे अन्य जिलों की तुलना में अधिक प्रदूषित किया हैं। घटते प्राकृतिक संसाधनों के कारण पारस्थितिकीय असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होने से पंचायतें अपने उद्देष्यों में सफल नहीं हो पा रही हैं। बढ़ती जनसंख्या, बारिष कम होना, जल की अधिक खपत वाली फसलों का उत्पादन, परम्परागत जल स्रोतों पर ध्यान नहीं देने से जिले में भू-जल स्तर की स्थिति चिंताजनक हैं।


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